उत्तराखंड

महड़ गांव में चंडिका देवी की बनियाथ महायज्ञ शुरू

महायज्ञ

आठ महीने की दिवारा यात्रा संपंन होने के बाद महड़ मे हो रहा महायज्ञ
रुद्रप्रयाग। दशज्यूला कांडई क्षेत्र के महड़ गांव में नौ दिवसीय महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ हो गया। क्षेत्र की आराध्य देवी चण्डिका की आठ माह की दिवारा यात्रा संपन्न होने के बाद बुधवार से महड़ स्थित शिवशक्ति मंदिर में बनियाथ महायज्ञ का आयोजन शुरू हो गया।

बड़ी संख्या में क्षेत्रीय भक्तों की मौजूदगी में महड़ शिवशक्ति मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चारण एवं पौराणिक रीति रिवाजों के साथ नौ दिवसीय महायज्ञ विधिवत शुरू हो गया है। यज्ञ में पूजा अर्चना के साथ ब्राहमणों ने जौ तिल व घी की आहुतियां डालने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहले दिन लगभग तीन हजार भक्तों ने महायज्ञ में पहुंचकर पुण्य अर्जित किया। 92 वर्षो बाद हो रहे महायज्ञ को लेकर क्षेत्रीय ग्रामीण के साथ ही धियाणियां खासी उत्साहित है। सुबह मां चंडिका की दिवारा यात्रा अपने मूल मंदिर महड़ बानातोली नाक स्थान पर पहुंची। जहां मां चंडिका ने गरूड छडा करने के बाद भक्तों को दर्शन दिए। इस दौरान मां चंडिका ने नृत्य करने के बाद मां चंडिका महायज्ञ में बैठी।
क्षेत्र की खुशहाली एवं समृद्धि के लिए महड़ गांव के बानातोली नामक स्थान पर नौ दिवसीय महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ हो गया है। महायज्ञ में 13 ब्राह्मणों ने गणेश पूजा, पंच पूजा, भद्र पूजा, चंडी पाठ, रुद्रीपाठ किया। जिसके बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ महायज्ञ में अग्नि प्रज्वलित की। और महायज्ञ में जौ, तिल व घी की आहुतियां डालने की प्रक्रिया शुरू की। महायज्ञ में 8 जून को भव्य जल कलश यात्रा का भव्य आयोजन किया जाएगा। चंडिका दशज्यूला दिवारा समिति के अध्यक्ष धीर सिंह विष्ट और सचिव देवेन्द्र जग्गी ने बताया कि मां चंडिका ने दिवारा यात्रा के 226 दिनों में 7 जिलों के 300 से अधिक गांवों का भ्रमण कर भक्तों की कुशलक्षेम पूछी। जून को भव्य जल कलश यात्रा एवं 9 जून को पूर्णाहुति के साथ इस महायज्ञ का समापन किया जाएगा। उन्होंने अधिक से अधिक भक्तों को महायज्ञ में पहुंचकर पुण्य अर्जित करने की अपील की है। इस मौके पर दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता संजय दरमोडा, जिपंस सविता भंडारी, समाजसेवी प्रेम बिष्ट, देवरा यात्रा के अध्यक्ष धीर सिंह, प्रबंधक हीरा सिंह, सचिव देवेन्द्र जग्गी, ब्रह्म गुरू हरि बल्लभ सती, जगदीश भंडारी, दलवीर सिंह नेगी, आचार्य लक्ष्मी प्रसाद कांडपाल, लक्ष्मीदत्त पुरोहित समेत कई भक्तजन मौजूद थे।
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