उत्तराखंड

विश्व धरोहर फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुली 

विश्व धरोहर फूलों की घाटी

नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क के डीएफओं ने हरी झंडी देकर रवाना किया पर्यटक दल
जोशीमठ। विश्व धरोहर एवं प्रसिद्ध पर्यटक स्थल फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुल गई है। नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क के डीएफओ नंद बल्लभ शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर 75 सदस्यी देशी-विदेशी पर्यटकों का दल रवाना किया। वन विभाग की टीम ने सभी पर्यटकों को यात्रा के लिए शुभकामनाएं दी।

प्रकृति के दीदारों को मिलेगा यहां की सुंदरता निहारने का अवसर
बताते चलें कि उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित फूलों की घाटी में हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। बीते दो सालों से कोविड के चलते यहां पर्यटकों की आवाजाही नहीं हो सकी। किंतु इस बार चारधाम यात्रा की तरह यहां भी अच्छी खासी संख्या में पर्यटकों के आने की उम्मीद है। आज सुबह 7 बजे नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क के डीएफओ नंद बल्लभ शर्मा हरी झंडी दिखाते हुए 75 सदस्यीय देशी-विदेशी पर्यटकों के दल को घांघरिया से रवाना किया। फूलों की घाटी गोंविदघाट से करीब 16 किमी की दूरी पर है। जबकि घांघरिया से 3 किमी की दूरी है। इस साल घाटी में समय से पहले 12 प्रजाति के फूल खिले हैं। जबकि यहां जुलाई और अगस्त में 300 से अधिक प्रजाति के रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं जिनका दीदार करने यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। यदि आप भी प्रकृति की सुंदरता को करीब से निहारने के शौकीन है तो आइए विश्व धरोहर फूलों की घाटी आपके आने इंतजार में है।-

इस साल समय से पहले खिले हैं घाटी में 12 से अधिक प्रजाति के फूल

यह है फूलों की घाटी की विशेषताएं-
यूनिस्को ने 2005 में किया था फूलों की घाटी को विश्व प्राकृतिक धरोहर घोषित
फूलों की घाटी दुनिया की इकलौती जगह जहां प्राकृतिक रूप से खिलते हैं 500 से अधिक प्रजाति के फूल
फूलों की घाटी 87.5 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला है जैव विविधता का खजाना
घाटी दुर्लभतम प्रजाति के वन्य जीव जंतु, पशु पक्षी,और जड़ी बूटी का है खजाना
हर साल हजारों देशी विदेशी पर्यटक पहुंचे हैं प्रकृति के अनमोल खजाने का दीदार करने
प्रकृति प्रेमियों और वनस्पतिशास्त्रियों की है पहली पसंद
जुलाई और अगस्त में खिलते है 300 से अधिक प्रजाति के फूल
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