उत्तराखंड

दरमोला के उफराई देवी मंदिर में सकलीकरण के साथ हुई मूर्ति स्थापित

उफराई देवी मूर्ति स्थापना

 2 अप्रैल से ऊपराई देवी मंदिर में होगा 9 दिवसीय महायज्ञ
आयोजन को लेकर भी ग्रामीणों ने की महायज्ञ को लेकर तैयारी शुरू
रुद्रप्रयाग। भरदार क्षेत्र के दरमोला गांव में स्थित मां उफराई देवी मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चारण एवं प्राण प्रतिष्ठा के साथ उफराई देवी की मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया गया। भक्तिमय माहौल के बीच बड़ी संख्या में लोगों ने मां के जयकारे लगाए। आगामी दो अप्रैल से मंदिर में 9 दिवसीय महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा जो हर 12 वर्षो बाद आयोजित किया जाता है।


रुद्रप्रयाग जिले के भरदार क्षेत्र स्थित दरमोला, जवाडी, रौठिया, स्वीली, सेम, डुंग्री, तरवाडी़, कोटली सहित आठ गांवों के सहयोग से उफराई देवी में धार्मिक अनुष्ठान किया गया। सोमवार को उफराई देवी मंदिर में पंचाग पूजा, गणेश पूजा, भद्र पूजा आदि पूजाएं संपंन हुई। ग्रामीण द्वारा पत्थरों की निकासी कर तैयार की गई ढ़ाई फीट चौडी व तीन फीट ऊंची मूर्ति को दरमोला गांव से वाद्य यंत्रों एवं ढोल नगाडों के साथ उफराई देवी मंदिर में लाया गया। धार्मिक माहौल के बीच विभिन्न देवी-देवता अवतरित हुए और भक्तों को आशीर्वाद दिया। मूर्ति के मंदिर पहुंचने पर भक्तों द्वारा फूल वर्षा के साथ जोरदार स्वागत किया। भक्तों के जयकारों के बीच सम्पूर्ण माहौल भक्तिमय बन गया। मूर्ति को सभामंडल में रखने के बाद पांच ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मूर्ति गंगा, पंच स्नान कराया गया। जिसके बाद मूर्ति की मंत्रों के साथ प्राण प्रतिष्ठा कर सकलीकरण किया गया। मूर्ति का श्रृंगार एवं सूक्ष्म हवन की मां का तिलक किया गया। जिसके बाद ही मूर्ति को मंदिर के अंदर स्थापित किया गया। उफराई देवी मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रकाश कप्रवान एवं उपाध्यक्ष विक्रम सिंह पंवार ने बताया क्षेत्र की खुशहाली व समृद्धि के लिए उफराई देवी मंदिर में 12 वर्ष बाद अयुत्त महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। चैत्र नवरात्र के मौके दो अप्रैल से देव निशानों के गंगा स्नान के साथ उफराई देवी मंदिर में अयुत्त महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। नौ अप्रैल को जल कलश यात्रा एवं 10 अप्रैल को पूर्णाहुति के साथ कार्यक्रम का समापन किया जाएगा। उन्होंने सभी आठ गांवों के ग्रामीणों से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा की गई।

इस अवसर पर उफराई देवी मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रकाश कप्रवान, उपाध्यक्ष विक्रम पंवार, कोषाध्यक्ष देवराज सिंधवाल, सचिव देव सिंह रावत, सह सचिव नागेन्द्र कप्रवान, संरक्षक जसपाल सिंह पंवार, मंगल सिंह, पुजारी योगेश डिमरी, ब्राह्मण वेदप्रकाश डिमरी, पुष्पानंद डिमरी, विजयानंद, विष्णु प्रसाद, लखपत सिंह, कमल सिंह, पूर्ण सिंह, विनोद पंवार, राकेश पंवार, दान सिंह, जसपाल सिंह, विजय सिंह, शूरवीर सिह समेत बड़ी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
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