उत्तराखंड

शीतकाल के लिए बंद हुए द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर के कपाट

परम्परा

रुद्रप्रयाग। द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर के कपाट बुधवार को प्रातः साढ़े आठ बजे वैदिक मंत्रोच्चार व विधि विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद किए गए। शनिवार 25 नवम्बर को भगवान की उत्सव डोली पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेवर मंदिर में विराजमान होगी। जहां भगवान की छह माह पूजा अर्चना की जाएगी।

जयकारों के साथ देर सांय डोली के गौंडार पहुंचने पर हुआ स्वागत

पौराणिक रीति रिवाज व परम्परा के अनुसार बुधवार को सुबह चार बजे पुजारी वागेश लिंग द्वारा पूजा अर्चना के बाद भगवान का रुद्राभिषेक किया गया जिसके बाद धाम में पहुंचे भक्तों ने भी भगवान का जलाभिषेक किया। इसके बाद विशेष पूजा अर्चना करते हुए भगवान को भोग लगाया गया। परम्परानुसार भगवान की समाधि पूजा की गई। पुजारी वागेश लिंग द्वारा फूल, फल, अक्षत, मेवे, ब्रह्मकल, भस्म से गर्भगृह में स्थित स्वयंभू शिवलिंग को समाधि दी गई। इसके साथ ही पंडित यशोधर मैठाणी द्वारा प्रातः छह बजे हवन यज्ञ की परंपरा को सम्पन्न किया गया। इसके बाद भगवान की भोग मूर्तियों को चलविग्रह उत्सव डोली में विराजमान किया गया। जिसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार व निशानों के साथ मन्दिर की तीन परिक्रमा व पात्रों का निरीक्षण करते हुए डोली पहले पड़ाव गौंडार के लिए रवाना हुई। मैखंबा,कूनचट्टी,नानौ,खटारा व बणतोली होते हुए डोली गोण्डार पहुंची जहां पर ग्रामीणों द्वारा डोली का भव्य स्वागत किया गया व भगवान को अर्ध्य लगाया जाएगा।

25 नवम्बर को डोली ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचेगी

गुरुवार 23 नवम्बर को डोली रांसी,24 को गिरिया गांव में रात्रि प्रवास के बाद 25 को ओंकारेश्वर मन्दिर में पहुंचेगी जहाँ पर डोली के स्वागत में भव्य मेले का आयोजन किया जाएगा। वहीं ऊखीमठ में डोली के स्वागत के लिए मन्दिर समिति ने सभी तैयारियां पूरी कर ली है। मन्दिर के कार्याधिकारी आरसी तिवारी ने बताया कि मन्दिर को फूल मालाओं से सजाया जा रहा है इसके साथ ही पैदल मार्गो को भी सजाया जाएगा। इस मौके पर पंच कार्यवारियान हकहकूक धारी वीर सिंह पंवार, शिवानन्द पंवार, प्रधान वीर सिंह, शिवसिंह पंवार, पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत, टीएस युद्धवीर पुष्पवान, रविन्द्र रावत, सूरज सिंह, डोली प्रभारी पारेश्वर त्रिवेदी, मृत्युंजय हीरेमठ, हेमंत,सुनील सिद्ध, संजय सिंह आदि मौजूद थे।

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